प्रखंड–घाटशिला जमशेदपुर में मुरली पारामेडिकल कॉलेज के तत्वावधान में पर्यावरण संरक्षण एवं पद्मश्री सम्मान प्राप्त समाजसेवी श्रीमती जमुना टुडू जी के अभिनंदन समारोह का भव्य आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत बैंड-बाजा एवं परेड मार्च के साथ श्रीमती जमुना टुडू का स्वागत कर की गई। तत्पश्चात् श्रीमती टुडू, कॉलेज की डायरेक्टर डॉ. नूतन रानी, श्री रामस्वरूप यादव, डॉ. अपूर्व विक्रम, संस्थापक श्री एस. मिस्त्री एवं श्रीमती शशिकला देवी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस अवसर पर ‘लेडी टार्जन’ के नाम से प्रसिद्ध श्रीमती जमुना टुडू ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि मुरली पैरामेडिकल कॉलेज शिक्षा के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण संस्थान है, जहाँ कम शुल्क में उच्चस्तरीय शिक्षा प्रदान की जाती है। यहाँ एससी, एसटी, ओबीसी एवं सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। सरकार की ई-कल्याण योजना के तहत लगभग 75% छात्रवृत्ति की सुविधा भी दी जाती है।
उन्होंने कहा कि “यहाँ से शिक्षा प्राप्त करने के बाद विद्यार्थियों के लिए रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं। घाटशिला, धालभूमगढ़, घोड़ाबांधा, चाकुलिया, बोडाम, पोटका, पटमदा एवं मुसाबनी प्रखंड के विद्यार्थी इस संस्थान से भरपूर लाभ उठा सकते हैं।”
श्रीमती टुडू ने कहा — “हमारी अपील है कि युवा वर्ग इन अवसरों का लाभ उठाए, 1–2 वर्ष में कोर्स पूर्ण कर आत्मनिर्भर बने और अपने जीवन को सुनहरे भविष्य की ओर अग्रसर करें।”
उन्होंने कॉलेज परिसर की सुंदरता की सराहना करते हुए कहा कि “प्रकृति की गोद में स्थित यह कॉलेज विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का आदर्श स्थल है, जहाँ का शांत वातावरण मन को एकाग्र करता है। यहाँ से जमशेदपुर, घाटशिला, मुसाबनी और बहरागोड़ा तक परिवहन सुविधा भी उपलब्ध है।”
कॉलेज में 10वीं उत्तीर्ण छात्र ड्रेसर कोर्स तथा इंटरमीडिएट उत्तीर्ण छात्र डीएमएलटी (DMLT) एवं डीओटी (DOT) कोर्स में अध्ययन कर सकते हैं। साथ ही, दूरदराज़ के विद्यार्थियों के लिए आवासीय छात्रावास की भी व्यवस्था की गई है।
श्रीमती जमुना टुडू ने अपने जीवन संघर्ष का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका पर्यावरण संरक्षण का सफर 1998 में आरंभ हुआ, जब उन्होंने उड़ीसा से विवाह उपरांत झारखंड आकर जंगल बचाओ अभियान की शुरुआत की। “वन सुरक्षा समिति” का गठन कर उन्होंने अवैध कटाई पर रोक लगाई और लगभग 125 एकड़ जंगल को पुनर्जीवित किया। उनके इस कार्य हेतु भारत सरकार ने उन्हें सन् 2019 में पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया।
कार्यक्रम के दौरान कॉलेज के छात्रों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ दीं। विद्यार्थियों ने ग्लोबल वार्मिंग एवं पर्यावरण संरक्षण पर आधारित नाटक प्रस्तुत कर सभी का मन मोह लिया।
श्रीमती टुडू ने कहा — “शिक्षा के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण भी हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। पर्यावरण और आदिवासी संस्कृति एक-दूसरे के पूरक हैं — हम पेड़-पौधों को भगवान मानते हैं, अतः उनकी रक्षा करना हमारा धर्म है।”
अंत में शिक्षक श्री सुदीप दत्ता ने कहा कि “बढ़ता हुआ वैश्विक तापमान आज चिंता का विषय है, जिसका समाधान अधिक से अधिक वृक्षारोपण ही है।”
धन्यवाद ज्ञापन करते हुए श्रीमती शशिकला देवी ने कहा —
“प्रकृति का न करें हरण, आओ मिलकर बचाएँ पर्यावरण।”
कार्यक्रम का समापन सभी गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति में परिसर में वृक्षारोपण कर एवं पर्यावरण संरक्षण की शपथ लेकर किया गया।