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“मैं जीना चाहती हूं…” – गुरुवारी की पीड़ा को मिला सहारा, समाजसेवी रवि जयसवाल ने बढ़ाया मदद का हाथ।

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जमशेदपुर : बागबेड़ा नई बस्ती (रोड नंबर–2, साईं बाड़ी) की 28 वर्षीय गुरुवारी, जो टीबी सहित अन्य गंभीर बीमारियों से जूझ रही थी और अपने पाँच वर्षीय दिव्यांग बेटे तथा एक वर्षीय छोटे बच्चे की परवरिश को लेकर निराशा और असहायता से घिरी हुई थीं, आखिरकार उनकी जिंदगी में उम्मीद की किरण जग गई।
गुरुवारी आर्थिक तंगी के कारण न तो उचित इलाज करा पा रही थीं और न ही भोजन, वस्त्र तथा अन्य जरूरी चीजों की व्यवस्था हो पा रही थी। लेकिन उनकी इस करुण पुकार को समाजसेवी रवि जयसवाल ने सुना और बिना देर किए आगे बढ़कर हर संभव सहायता उपलब्ध कराई।
समाजसेवी रवि जयसवाल द्वारा गुरुवारी को गर्म कपड़े, दवाइयाँ, पौष्टिक आहार किट, पूरे परिवार के लिए राशन तथा अन्य आवश्यक सामग्रियाँ उपलब्ध कराई गईं।
रवि जयसवाल ने सुनिश्चित किया कि गुरुवारी को उपचार से लेकर भोजन तक, किसी भी चीज़ की कमी न रहे। इस सहायता के बाद गुरुवारी की आंखों में आशा की चमक लौट आई है और वह अपने दोनों बेटों के लिए नई उम्मीद के साथ जीवन जीने का साहस पा रही हैं।
गुरुवारी की बहन सोमबारी गागराई ने समाजसेवी रवि जयसवाल के प्रति  धन्यवाद व्यक्त किया है कि उनकी समय पर दी गई मदद ने गुरुवारी व उनके बच्चों को नया जीवन–संकल्प दिया है।
यह मानवता और करुणा का एक सशक्त उदाहरण है कि समाज में संवेदनशील लोग आज भी मौजूद हैं जो किसी की पीड़ा को देखकर बिना किसी स्वार्थ के आगे बढ़कर मदद के लिए खड़े हो जाते हैं।

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